जब धाराएँ विपरीत हों
उछलती कूदती तेज गति
किनारे तोड़ देने को आतुर
धारा के विपरीत तैरना ही नही
डट कर जगह पर स्थिर रहना
भी, किसी क्रांति से कम नही।
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जब धाराएँ विपरीत हों
उछलती कूदती तेज गति
किनारे तोड़ देने को आतुर
धारा के विपरीत तैरना ही नही
डट कर जगह पर स्थिर रहना
भी, किसी क्रांति से कम नही।
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जो युद्ध चाहते हैं
वो नफरत करते हैं
स्वाद, सुगंध, संगीत से
चित्त की स्थिरता से
अराजकता, कोलाहल
भय का दावानल
लोग - डरे, सनके,
हथियार हैं उनके
स्वाद लग जाए जब
इंसानी खून का तब
आदमखोर कहलाता
पशु मार दिया जाता
रक्त पिपासु ये, इनकी
प्यास नही बुझती, जिनकी
फितरत में नफरत है
वो युद्ध चाहते हैं।
पानी रखो,
पात्र मे भी
आँख मे भी
खत्म हुआ तो
शरीर मर जाएगा
आत्मा मर जाएगी।
कविता क्या है?
ढलते सूरज की लाली,
पंछियों का कलरव है।
देर रात सा सन्नाटा,
होली सा उत्सव है।
हरसिंगार की खुशबू
गुलमोहर की लाली है।
कोयल की गूँजती कूक
बौराए आम की डाली है।
सूरज की तेज धूप
समन्दर का शोर है।
गाँव की पगडंडी सा,
पत्थर सा कठोर है।
बूढ़े की चिंता सा,
बच्चे की हँसी है।
मन भावों को पकड़े,
उस अनंत का अंत है।
कविता क्या है?
मन ने, और मौन ने,
जो धारण किया है
वह वस्त्र है!
विश्व कविता दिवस। #worldpoetryday
डूबता सूरज
नीले आसमान को
नारंगी करता हुआ
लाल-बैंगनी-काला
अंधेरा भरता हुआ
डूबेगा सूरज तो
निकलेंगे सूरज कई
जुगनुओं में, दीपों में
तारों में, ले रौशनी नई
गिद्ध
तुम नोचते
मरणोपरांत
नोच कर मारना
मार कर नोचना
बस इंसानो की
खासियत है
#truth
टी वी ने कहा
पूछ डाला तो
लाइफ झिंगालाला
तो हमने पूछा
महँगाई घटेगी?
वे बोले - तुम हो
जिम्मेदार इसके
आबादी बढ़ाते,
बढ़ाते ही जाते
हर एक जगह
लाइन हो लगाते
हमने फिर पूछा
शिक्षा हमारी
क्यों है लचर?
क्या है बीमारी?
वे बोले - अभी
बताया तो था
कि तुम ही हो
जिम्मेदार इसके
हमने फिर से
नया सवाल दागा
स्वास्थ्य व्यवस्था
किधर है भागा?
वे गुस्सा हो गए
कितनी बार बताऊँ
कि तुम ही हो
जिम्मेदार इसके
गंदगी फैलाते तुम
तंबाकू चबाते तुम
खुद दवाईयाँ खरीद
डाक्टर बनते तुम
हमने किया अपने
ब्रह्मास्त्र का वार
क्यों नहीं है काबू
देश में भ्रष्टाचार?
इस बार तो वे बस
मुस्कराए, फिर हँसे
अबकी बार तुम
बिलकुल सही फँसे!
हाथी के दाँत हैं
इस पर तुम सोचना
और हाँ। खबरदार!
दोबारा मत पूछना
अनमयस्क सा आकाश
अनासिक्त सा अंतर्मन
ख्वाहिशों की डोर कभी
हाथ आती, छूट जाती
आजादी
सोचने की
समझने की
सुनने की
बोलने की
सम्मान
व्यक्ति का
राष्ट्र का
देने की आजादी
पाने का भी हक
समानता
विचार में
व्यवहार में
भागीदारी में
सम्मान में
उम्मीद - कि
नेक बनेंगे
एक बनेंगे
एक रहेंगे
संग चलेंगे
चौहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस की बधाई।