Friday, April 4, 2008

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून

बिल्ली को सामने देख जैसे कौवे काँव - काँव करने लगते हैं, नेताओं को गांधी जी जैसे सिर्फ़ नोटों पर सुहाते हैं और जैसे सरकारी शिक्षक सिर्फ़ इंस्पेक्शन वाले दिन ही पढाते हैं, वैसे ही गर्मी को देख, मुझे भी पानी की कहानी याद आ गयी। अब आप चाहें तो मुझे मौकापरस्त कह सकते हैं। आख़िर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमें हमारे संविधान ने दी है।

प्रकृति ने हमें अनेक नेमतों से नवाजा है। स्वच्छ वायु और शीतल जल उनमे से हैं। आज के पोस्ट में मैं सिर्फ़ जल की बात करूंगा।

यूं तो पृथ्वी का दो-तिहाई हिस्सा जल से ढंका है, किंतु इंसानों के प्रयोग लायक जल बहुत ही कम है। जल का मुख्य भण्डार हमारे सागर-महासागर हैं। फिर है दोनों ध्रुवों और पर्वतों पर बर्फ के रूप में जमा हुआ पानी। तीसरा है हमारे भूमिगत जल स्त्रोत। जमीन की सतह पर बह रही नदियों और तालाबों में जमा पानी भी है किंतु इन्हे भी बर्फीले ग्लासिएरों या भूमिगत स्त्रोतों से ही पानी मिलता है। हमारे वातावरण में मौजूद जल-वाष्प भी जल का एक बड़ा भण्डार हैं।

पृथ्वी पर मौजूद जल का तकरीबन ९७% हिस्सा सागरों और महासागरों के खारे पानी के रूप में है। बाकी का करीब ३% हिस्सा ही हमारे काम का है। उसमें से भी, ६७ - ६८ % हिस्सा बर्फ के रूप में जमा हुआ है। करीब ३०% हिस्सा भूमिगत जल का है। नदियों, झीलों और तालाबों में १% से भी कम ताजा पानी है।

हम इंसान इतने कम उपलब्ध जल के स्त्रोतों का इस तरह से दोहन कर रहे हैं की जल्द ही हमारे सामने जल संकट अपने विकरालतम रूप में मौजूद होगा। हमारे उपयोग का लगभग सारा जल नदियों, झीलों या भूमिगत स्त्रोतों से आता है। हम न सिर्फ़ जल का उपयोग करते हैं, बल्कि उसे प्रदूषित भी करते हैं। इस तरह हम दोधारी तलवार से अपने जीवनदाता पर वार कर रहे हैं।

जल की उपयोगिता की चर्चा करना व्यर्थ है। यदि कहूं कि "जल ही जीवन है" तो अतिशयोक्ति नही होगी। किंतु कैसा जल जीवन है? हमारे कुछ उपयोग जीवन को सहारा देने वाले हैं जैसे की जल का भोजन और पीने के लिए उपयोग। फिर कुछ अन्य सहयोगी कार्य भी हैं जैसे नहाना, कपडे-बर्तन धोना और उद्योग धंधों में काम आने वाला पानी।

पानी पृथ्वी पर पायी जाने वाली एकमात्र ऐसी चीज़ है जो वस्तु के तीनो अवस्थाओं ठोस (बर्फ), तरल (जल) और गैस (जल-वाष्प) रूपों में एक साथ प्राकृतिक तौर पर मौजूद है। जो जल हमें मिलता है, उसमे कई तरह के कण और सुक्ष्म जीव होते हैं। उसमें कुछ हमें फायदा पहुंचाते हैं तो कुछ हमारा नुकसान भी करते हैं। आईये देखें कि जल में कौन-कौन से गुण होने चाहिए।

1. जल में आंखों से दीखने वाले कण और जीव-वनस्पति नही हों।
2. हानि पहुँचानेवाले सुक्ष्म जीव या कण न हों।
3. जल का pH संतुलित हो।
4. जल में पर्याप्त मात्र में oxygen घुला हो।

जब मैंने शुरू किया था, तब सोचा नही था कि इतना लिख देने के बाद भी इतना ज्यादा बचा रह जाएगा। अपने आने वाले पोस्ट में जल-शुध्धिकरण, प्रदूषण और जल-संग्रहण की चर्चा करूंगा।