Friday, February 15, 2008

प्रेम ना हाट बिकाय

वैलेंटाइन डे आया और चला भी गया। अखबार में समर्थन और विरोध के स्वरों के बीच प्यार करने वाले (?) हाथ में हाथ थामे अखबारों की सुर्खियाँ बने नज़र आए। साथ ही नज़र आए तथाकथित भारतीय संस्कृति के पहरुए, हाथों में लाठी-डंडा लिए। कभी पार्क में किसी को निशाना बनाया तो कभी दुकानों में तोड़-फोड़ की।

ये सब कुछ देख कर मुझे कबीर की याद आयी.... प्रेम ना खेतों ऊपजे, प्रेम ना हाट बिकाय।

अखबारों में अलग - अलग किस्म के एक्सपर्ट्स अपनी-अपनी रायशुमारी में व्यस्त दिखे। किसी ने कहा की लाल गुलाब फलां शास्त्र की नज़र में दुःख का कारण है, खासकर काँटों वाले गुलाब, इसलिए पीले गुलाब भेंट करने चाहिए! किसी ने कहा की यदि आप फलां ब्रांड की परफ्यूम या chocolate अपने साथी को भेंट नही करते तो यकीन जानिए कि आप प्यार के लायक ही नही।

कुछ वैज्ञानिक विचार धारा के बुद्धिजीवियों ने दिल, दिमाग और होर्मोनेस को प्यार के बुखार के लिए जिम्मेदार बताया। कुछ ने श्रृंगार रस में प्यार को खोजा, तो कुछ ने शिव और मदन की गाथा ही सुना डाली।

कुल मिला कर ये ही हुआ कि मेरी छोटी सी बुद्धि में बड़ी-बड़ी बातें नही आयी। आयी तो बस एक कथा कि याद आयी... एक हाथी था.... आगे तो आप समझ ही गए होंगे!