Thursday, December 3, 2009
Remembering Deshratna Dr. Rajendra Babu
Wednesday, November 25, 2009
शाबाश मुकंदी!
जमशेदपुर चुनाव के ऐन पहले लापतागंज के नेताजी शर्मिंदा हो गए. शरद जोशी जी की व्यंग रचना की पराकाष्टा देखने को मिली जब नेता जी कहते हैं कि शर्मिंदा होने से फुर्सत मिले, तब तो काम करें! और जवाब में अपने मुकंदी भैया मिल-बाँट कर शर्मिंदा होने का प्रस्ताव रखते हैं: "देश की हालत पर हम शर्मिंदा हो लेते हैं, देश को इस हालत में लाने के लिए आप शर्मिंदा हो लें!" जीत सदा-सर्वदा की तरह नेताजी की होती है और जनता शर्मिंदा होती है कि ऐसा नेता क्यों चुना......
अंतमें
एक ही बात .......
शाबाश मुकंदी!
Saturday, October 3, 2009
सच का सामना
Wednesday, September 30, 2009
Thank You
Thursday, August 20, 2009
Superhero
Wednesday, August 12, 2009
Beauties on the roads
Thursday, August 6, 2009
Saturday, July 25, 2009
Who Am I?
Obedient, Knowledgeable and Proactive
Versatile yet strong, soft yet assertive
Lightening fast with a killer instinct
Is it me? Or my persona is distinct?
Looked upon as a man of substance
I just wonder, who I am?
Everyone has the right to think
I'm there for them, at eye's blink
Friend, son, husband and father
Numerous relations, to fulfill and gather
Unfeigned within or just a sham
I just wonder, who I am?
Friday, July 3, 2009
Think Again: Swine Flu
Thursday, July 2, 2009
तीन टांगो वाला आदमी
"अचानक इ राम-राम कइसे सूझा?"
"भइया, एक किताब पढ़ रहे थे जिसमे गाँव का एक आदमी मरते समय अपने बेटा को कहता है कि
१ हमेशा छावँ में काम पर जाओ और काम से आओ
२ मुसीबत में तीन टांग वाले से मदद लो।"
"अब एक कहानी सुनो" मटकू भइया बोले।
"एक गाँव में किसी लड़के कि शादी थी। बारात की तैयारी धूम धाम से चल रही थी। साथ ही लड़की-पक्ष कि एक विचित्र शर्त भी चर्चा में थी - बारात में सारे जवान होंगे! खैर, जब बारात चलने लगी तो एक बूढा आ कर साथ चलने कि जिद्द करने लगा। वैसे तो उसे कोई भी ले जाने को तैयार नही था पर उसकी जिद्द के आगे जवानों की एक न चली। बूढा बस की छत पर जा कर लेट गया। बारात पहुँची तो उसका स्वागत धूम-धाम से हुआ। जवानों ने आँख बचा कर बूढे-बाबा के लिए भी पकवानों कि व्यवस्था कर दी।
जब लड़का मंडप पर बैठ गया तो लडकी वालों ने एक और विचित्र शर्त सामने रखी। कहा गया कि गाँव में जो तालाब है, उसे लड़के-वाले दूध से भर दें, तभी शादी होगी। कुछ अति-उत्साही लड़के तालाब देखने गए पर उसे देख कर उनके होश उड़ गए। वह काफी बड़ा तालाब था! सरे लोग बस के पास विचार करने में लगे थे। उनको परेशान
देख बूढे-बाबा बोले - कोई परेशानी है क्या? पहले तो किसी ने उन पर गौर नही किया पर फिर सबने अपनी समस्या सुना दी। बाबा बोले - इतनी सी बात? अब तो लड़के उखर गए - इतना बड़ा तालाब है, खाली भी करना है और भरने के लिए दूध का भी इन्तेजाम करना है, आधी रात में हमारा दिमाग ख़राब हो रहा है और आप.... जैसे-तैसे सबों को शांत किया गया। फिर बाबा ने अपनी तरकीब बता दी। अब तो लड़के खुशी-खुशी मंडप पर पहुंचे - ऐसा है भाई कि हमलोगों ने तालाब देख लिया है, दूध का भी इन्तेजाम कर लिया है। अब लड़की-वालों की जिम्मेदारी है कि जल्दी से तालाब से पानी निकाल दें ताकि हम उसमे दूध भर सकें!
यही है तीन-टांगो वाले आदमी का कमाल। कुछ समझे?"
मैं हर बार की तरह सिर्फ़ अपना सर हिलाता रह गया!




