आज राधे बाबू का जन्मदिन है। यूँ तो उन्हें भी नही पता कि उनका जन्म किस दिन हुआ। माँ को भी सिर्फ इतना याद है कि भीषण गर्मी में वे पैदा हुए थे। शायद वो दिन वटसावित्री व्रत का दिन था। स्कूल में मास्साब ने जन्मतिथि एक अप्रैल की लिख दी। नौकरी भी उसी आधार पर मिल गई। अब कौन याद रखे फिजूल की बातें?
पर आज कुछ खास है। आज राधे बाबू का उनसठवाँ आधिकारिक जन्मदिन है। बस एक साल और। उसके बाद सेवानिवृत्ति! वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में पदार्पण!
अलविदा
गुजरे साल
बहुत दिया तुमने
अच्छा लगा, तुम्हारा यूँ
आँसू, खुशी, निराशा, आशा लाना
सहने, लड़ने, डरने, भिड़ने, तत्पर रहने
स्व को स्वनिर्मित करने का जज्बा उभारने
मुझे खुद से बेहतर बनाने के लिए, शुक्रिया।
सर्दियाँ
मौसम नही
एक एहसास है
खुशी का, उत्सव का
अमीरों के गुलाबी शाम हैं
खनकती हँसी, हाथों में जाम है
गरीबों के लिए ठिठुरन, बुझती अलाव है
सुबह जिंदा हैं, यही उत्सव, यही घाव है।